** भगवती मूलप्रकृति की शक्ति **
सृष्टि के आरम्भ में भगवती मूलप्रकृति ने अपनी प्राण शक्ति से राधादेवी और बुद्धि शक्ति से दुर्गा देवी को उत्पन्न किया।
"""" ह्रीं श्रीराधायै स्वाहा """" इनका मूल मंत्र है।
इस मंत्र के ऋषि नारायण हैं। देवता राधा देवी और छंद
गायत्री है।भुवनेश्वरी शक्ति हैं ।राधा का शाब्दिक अर्थ
सकल मनोकामना पूर्ण करने वाली कहा गया है९/५०/१७ ।।
राधा का प्रथम दर्शन नारायण ऋषि को हुआ था।
भगवती दुर्गा जो सृष्टि की बुद्धि हैं उनका मूल मंत्र नवार्ण है।
अतः श्री राधा और भगवती दुर्गा को मूल प्रकृति से समुत्पन्न कहा गया है।
देवी भागवत ,९ स्कंध , ५० अध्याय ।