प्रारब्ध और पुरुषार्थ
मनुष्यका निश्चय एक होना चाहिए और वह परमात्माकी तरफ ही हो सकता है , क्योंकि वह एक है । संसारमें
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Read more(गणपति का आधिदैविक स्वरूप): ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्तासि ॥ त्वमेव केवलं धर्तासि ॥
Read moreजो कुछ भी शास्त्रों के अनुसार हो, वही आदर्श तथा लाभदायक सिद्ध होता है । यदि श्रीगणेशजी की मूर्ति मूर्तिविज्ञान
Read moreआइये सभी अट्ठारह पुराणों के कुछ पहलुओं को संक्षिप्त में समझने की कोशिश करते हैं। प्रस्तुति विस्तृत है, इसलिए शेयर
Read more“माता मैं आ रहा हूँ”- कंस के कारागार में बंद देवकी के कानों में एकाएक यह कैसा, किसका मिश्री सम
Read moreद्रोणाचार्य सरीखे शास्त्रज्ञ गुरु भी धर्म का तत्व नहीं समझ पाए। भीष्म पितामह जैसे धर्म सम्राट को भी धर्म का
Read moreजब स्त्री के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु का संयोग होता है उस समय सूक्ष्म जगत में एक विस्फोट सा
Read moreमनुष्य शाकाहारी परिवार प्राइमेट्स से निकला है । अतः फल और सब्जियाँ मनुष्य का प्राकृतिक आहार है । जितना कम
Read moreभारत त्योहारों का देश है जहाँ पूरे वर्ष ही अनेक त्यौहार मनाये जाते हैं| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में हम
Read moreगाय एक ऐसा प्राणी है, जिसमें भगवान का वास माना गया है। शास्त्रों के अनुसार गौमाता में ३३ कोटि देवताओं
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