पुत्रैषणा त्यागें, अपना पिंडदान जीते जी स्वयं करें

माता पिता को अपने पुत्र के लिए बड़ी चिन्ता रहती है, परन्तु पुत्रैषणा के साथ ही अनेक वासनाएँ भी आती

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लोकालोक दर्शन

धर्म की संस्थापना के लिये श्रीविष्णु हर महायुग में दश अवतार लेते हैं,जिनमें अन्तिम तो महायुग के अन्त में आते

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कभी न उजागर करें ये ९ बातें

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार यदि आप चैन से जीना चाहते हैं तो अपने जीवन की ये नौ बातें कभी भी

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पत्नी वामांगी क्यों कहलाती है?

शास्त्रों में पत्नी को वामंगी कहा गया है, जिसका अर्थ होता है बाएं अंग का अधिकारी। इसलिए पुरुष के शरीर

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