पुत्रैषणा त्यागें, अपना पिंडदान जीते जी स्वयं करें

माता पिता को अपने पुत्र के लिए बड़ी चिन्ता रहती है, परन्तु पुत्रैषणा के साथ ही अनेक वासनाएँ भी आती

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अधिक पूजा पाठ करने वाले अधिक दुखी क्यों?

हमे मिलने वाले सुख या दुख का कारण भगवान नही अपितु हम ही हैं। हमारे कर्म ही हमें सुख दुख

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