तुम्हीं हो माता, पिता तुम्हीं हो 🙏🏻

त्वमेव माता च पिता त्वमेव,त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,त्वमेव सर्वम् मम देवदेव।। अपने एक भी स्वजन को अचानक,

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गौ सेवा और राजयोग

हमारे पुराणों में ऐसे कई वृतांत आते हैं जहां पर सतयुग और त्रेता युग के राजाओं ने गौ माता की

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देवतत्त्व और अपराध

जो सृष्टि में सहयोग दें वे #देवतत्त्ववान् हैं और जो सृष्टि को विकृत् करें वे शैतान हैं। सृष्टि निष्कामवान् परमात्मा

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जीवन का अंधकार और प्रकाश

एक कहानी बचपन में पढ़ी थी कि एक बार अंधकार, भगवान के पास शिकायत करने गया कि जब भी मैं

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मोक्ष कैसे होता है ?

“मोक्ष कैसे होता है ?” उत्तर — सारी ईच्छाओं से पिण्ड छूट जाने पर । पहले तामसिक ईच्छाओं से,फिर राजसिक

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अधिक पूजा पाठ करने वाले अधिक दुखी क्यों?

हमे मिलने वाले सुख या दुख का कारण भगवान नही अपितु हम ही हैं। हमारे कर्म ही हमें सुख दुख

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क्यों अच्छे और भले लोगों को जीवन में अधिक दुख मिलता है ?

प्रश्न : मन में कभी-कभी संदेह ऐसा होता है कि हमारा धर्म कहता है कि जैसे कर्म करोगे, वैसा फल

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आज चंद्रमा से बचकर रहिये

⛳जानिये रहस्य, चंद्रदर्शन से क्यों लगता है दोष⛳ भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को चंद्रदर्शन निषेध माना गया

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श्री गणेश तत्त्व और महोत्सव

भगवान गणेश का प्राकट्य भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि को हुआ था– नभस्ये मासि शुक्लायाम् चतुर्थ्याम् मम जन्मनि। दूर्वाभि: नामभिः पूजां

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श्रीगणेश गीता में योग

वरेण्य उवाच किं सुखं त्रिषु लोकेषु देवगन्धर्वयोनिषु । भगवन् कृपया तन्मे वद विद्या विशारद ।।२०।। अर्थ:- वरेण्य बोले – भगवन्

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