माँ सरस्वती की कृपा का प्रतीक बसंतपंचमी

*पुनि बंदउँ सारद सुरसरिता। जुगल पुनीत मनोहर चरिता॥ मज्जन पान पाप हर एका। कहत सुनत एक हर अबिबेका॥1॥ भावार्थ:-फिर मैं

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श्रीनाथद्वारा जहाँ औरंगजेब ने भी देखी श्रीनाथ जी की महिमा

भले ही यह प्रसंग इतिहास में न आया हो किन्तु इसे जन-श्रुति या लोक-श्रुति कह सकते हैं ! श्रीनाथद्वारा में

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मुझे श्री कृष्ण ही चाहिए

(श्री अर्जुन द्वारा श्री कृष्ण का चयन क्यों?) विराट नगर में श्री अर्जुन संध्या वन्दन कर अभी आसन पर ही

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हिन्दू जीवन पद्धति – भाग २

***( भोजन संविभाग )*** सनातनहिन्दूधर्म में भोजन का भी संविभाग और विभेद विस्तार के साथ किया गयाहै।सर्वमन्ने प्रतिष्ठितम्,सर्वमन्न- मयं जगत्

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हिन्दू जीवन पद्धति

जो व्यक्ति अपने चौबीस घण्टे की जिन्दगी को साध लेता है वह सफलहो जाता है,क्योंकि इसी चौबीस घण्टेमें क्रम पूर्वक

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क्या जूठे भोजन से प्रेम बढ़ता है ?

जूठे भोजन से प्रेम तो नहीं बढ़ता ,हाँ रोग अवश्य हो सकते हैं । यहां तक हमने जूठे का अनुभव

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हनुमान जी की पूजा शनिवार व मंगलवार को ही क्यों?

शनिवार और मंगलवार को हनुमानजी की पूजा करने से हनुमान जी अधिक प्रसन्न होते है। इस दिन पूजा-अर्चना को सर्वश्रेष्ठ

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